बसना

ग्राम कायतपाली में नवनिर्मित शंकर जी मंदिर का उद्घाटन – एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन

बसना : ग्राम कायतपाली के तालाब किनारे भगवान शंकर का नवनिर्मित मंदिर पूर्ण रूप से तैयार हो चुका है। उद्घाटन समारोह के उपलक्ष्य में चार दिवसीय रात्रि कालीन कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसे लेकर गाँव और आसपास के लोगों में भारी उत्साह है। इस आयोजन की तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी हैं, जिसमें समस्त ग्रामवासियों ने आर्थिक, श्रम और सहयोग से अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है।
इस शुभ अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जहाँ ग्राम और आसपास के श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक लाभ लेंगे, बल्कि मनोरंजन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी अनुभव करेंगे।
महादेव के दर्शन: केवल भक्ति ही नहीं, गहरे संदेश भी
भगवान शंकर की भक्ति और आस्था अनंतकाल से चली आ रही है और आगे भी बनी रहेगी। लेकिन क्या हमने कभी यह विचार किया है कि महादेव के प्रतीकों, उनके स्वरूप और उनकी जीवनशैली से हमें क्या सीखने को मिलता है? उनकी आराधना केवल पूजा-पाठ और इच्छाओं की पूर्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें उनके गहरे दर्शन और संदेशों को भी आत्मसात करना चाहिए। आइए, उन महत्वपूर्ण शिक्षाओं पर ध्यान दें, जो शिव हमें अपने स्वरूप के माध्यम से प्रदान करते हैं—

  1. बैल की सवारी – मेहनतकश, अनुशासन और सेवा का प्रतीक
    भगवान शिव का वाहन नंदी (बैल) है, जो कठोर परिश्रम, अनुशासन, और सेवा भावना का प्रतीक है। बैल कभी भी श्रम से पीछे नहीं हटता, वह हर परिस्थिति में किसानों और मानव समाज के लिए उपयोगी होता है। यह हमें सिखाता है कि जो व्यक्ति मेहनत करेगा, अनुशासित रहेगा और अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाएगा, उस पर शिव की कृपा सदैव बनी रहेगी।
  2. गले में विषधारी सर्प – कठिनाइयों को स्वीकार करने की सीख
    शिव अपने गले में ज़हरीले साँप को धारण करते हैं। इसका गहरा संदेश यह है कि जीवन में हमें कितने ही विषैले और कठोर स्वभाव के लोग मिलें, हमें उन्हें अपने धैर्य, विवेक और आत्म-संयम से संभालना चाहिए। जो व्यक्ति विष (बुराई, ईर्ष्या, कटुता) को अपने भीतर स्थान नहीं देता और सबको समभाव से स्वीकार करता है, उसके लिए यह संसार किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं बनता।
  3. जटाओं से बहती गंगा – ज्ञान की निर्बाध धारा
    भगवान शिव के सिर से गंगा प्रवाहित होती है, जो उनके अपार ज्ञान का प्रतीक है। शिव हमें यह सिखाते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है, और हमें इसे सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे सभी के कल्याण के लिए प्रवाहित करना चाहिए। सही ज्ञान ही समाज को दिशा देने का कार्य करता है और अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है।
  4. सहज, सरल और प्राकृतिक जीवनशैली
    शिव बिना किसी आडंबर और बनावट के, केवल बाघम्बर धारण किए, कैलाश पर निवास करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन को जितना सरल और प्राकृतिक बनाएंगे, उतना ही हम संतोष और शांति का अनुभव करेंगे। बाहरी आडंबर और दिखावे से अधिक महत्वपूर्ण है सच्ची साधना और आत्मिक शुद्धता।
    समाज के लिए शिव दर्शन का महत्व
    शिव केवल एक पूजनीय देवता नहीं हैं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक भी हैं। यदि हम उनके संदेशों को समझें, परखें और अपने जीवन में अपनाएँ, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि पूरा समाज एक बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव न होकर, एक आत्मचिंतन और जीवन-सुधार का अवसर बने, यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता होगी।
    आइए, इस भव्य आयोजन के माध्यम से शिव के वास्तविक दर्शन को आत्मसात करें और स्वयं को, अपने परिवार को, और अपने समाज को एक नई दिशा दें!

Narayan dubey

संपादक शिखर न्यूज छत्तीसगढ़

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