मध्यप्रदेश
माँ की गोद और किस्मत की चोट जबलपुर में हुए हृदय विदारक घटना पर लिखित विचारक कुलदीप दुबे की यह पंक्ति निश्चय रूप से आपके आखों में आंसू ला देंगे

कुलदीप दुबे
माँ की गोद और किस्मत की चोट,चिरनिद्रा में समा गए दोनों
मेरे लाल 9महीने कोख में उठाये रखी, तेरे आने की खुसी में सारे थकान भूल गयी।
तू आया तुझे गले लगाया आँचल में छुपाया ,दुनिया सारी भूल गयी।
बैठने लगा उठने लगा ,खुद से चलने की कोशिश में तू जिधर चला तेरे संग चली गयी।
इतनी खुसी गोद मे लेने की तुझे, सारे दुख दर्द भूल गयी।
अभी तो बस तेरा बचपना देखा था, पता नही किस्मत मुझसे क्यो रुठ गयी।
हर बार खुसी देता गले लगाना तेरा मुझे, आज गले लगा के मैं शीषक गयी।
जाने किसकी नज़र लगी मेरे ममता को मेरे लाल ,क्या क्या सपने नही थे लेकिन, तुझे गले लगाए चिरनिद्रा में सो गई।
लेखन- कुलदीप दुबे
लेखक शिखर न्यूज़ छत्तीसगढ़ के सह संपादक है