आई.एस.बी.एम.विश्वविद्यालय में ECETD-2026 राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने तकनीकी विकास के सामाजिक प्रभावों पर किया मंथन

“तकनीकी विकास के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी जरूरी: कुलपति
“शोध में गुणवत्ता, मौलिकता और नैतिकता जरूरी: डॉ. संजय कुमार”
छुरा/ आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय छुरा में अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा “Ethical Challenge in Engineering & Technology Development (ECETD-2026)” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 24 सितंबर 2026 को किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी के तेजी से हो रहे विकास के साथ उभर रही नैतिक चुनौतियों, सामाजिक प्रभावों तथा जिम्मेदार तकनीकी विकास पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह रेखांकित करना रहा कि आधुनिक तकनीक का विकास केवल नवाचार, गति और आर्थिक प्रगति तक सीमित न रहकर मानवीय मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, पारदर्शिता, सुरक्षा और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार ने कहा कि आज इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन, साइबर तकनीक तथा नई वैज्ञानिक उपलब्धियों ने विकास के नए अवसर प्रदान किए हैं, लेकिन इनके साथ अनेक नैतिक प्रश्न भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि “तकनीक की सफलता तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और उसके प्रयोग से मानव गरिमा एवं सामाजिक मूल्यों की रक्षा हो।”
अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. एन. के. स्वामी ने कहा कि 21वीं सदी में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के साथ-साथ नैतिक निर्णय क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की समझ भी विकसित करनी होगी।
सम्मेलन मे मुख्य वक्ता के रुप मे शामिल डॉ. संजय कुमार ने अपने उद्बोधन में उच्च शिक्षा में शोध की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी आज मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल नए उपकरणों का निर्माण नहीं, बल्कि मानव आवश्यकताओं की पूर्ति और समाज के कल्याण में योगदान देना होना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति आवश्यक है। उन्होंने महान वैज्ञानिकों के उदाहरण देते हुए निरंतर प्रयास और नवाचार के महत्व को रेखांकित किया तथा भारतीय वैज्ञानिक एवं गणितीय परंपरा पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा शोध की गुणवत्ता और नैतिकता पर जोर देते हुए उन्होंने Research Integrity तथा Retracted Articles की अवधारणा समझाई। उन्होंने प्रो. सी. राधाकृष्ण राव का उदाहरण देते हुए कहा कि सीखने और शोध की कोई उम्र नहीं होती।
अगले वक्ता के रूप में शामिल डॉ. ओमप्रकाश देवांगन ने “कोड से परे: इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग के दौर में डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम आधुनिक इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग की आधारभूत संरचना हैं। केवल कोडिंग ही पर्याप्त नहीं, बल्कि डेटा प्रबंधन, तार्किक सोच और प्रभावी समस्या-समाधान भी तकनीकी दक्षता के लिए आवश्यक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोग्रामिंग के साथ मूलभूत कंप्यूटिंग अवधारणाओं और समस्या-समाधान कौशल को मजबूत करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल तकनीक के विकास में डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा, नैतिकता और तकनीकी जवाबदेही को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
डॉ. संजय शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, अमिटी यूनिवर्सिटी रायपुर ने अपने संबोधन में इंजीनियरिंग विकास में सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी समाधान की सफलता केवल उसकी कार्यक्षमता से नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा, विश्वसनीयता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव से भी निर्धारित होती है। उन्होंने सतत एवं जिम्मेदार इंजीनियरिंग को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान विशेषज्ञों और शोधार्थियों के बीच प्रश्नोत्तर एवं विचार-विमर्श भी हुआ। इससे प्रतिभागियों को अपने शोध कार्यों पर विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त करने तथा नए शोध आयामों को समझने का अवसर मिला। सम्मेलन में आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संयोजक डॉ. हनी गौर, सह संयोजक श्री दुष्यंत कुमार यादव एवं आयोजन समिति के सदस्य श्री संजीव जांगडे व सुश्री रीना चौहान ने सफल आयोजन किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. गौर ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्यक्रम से जुड़े अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।



