गरियाबंद

आईएसबीएम विश्वविद्यालय में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधा रोपण कार्यक्रम

जलवायु परिवर्तन से बचाव का सर्वाधिक सहज एवं प्रभावी प्राकृतिक उपाय है वृक्षारोपण : डॉ. रानी झा


केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं, उसे संरक्षित कर वृक्ष बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी : डॉ. एन. कुमार स्वामी

छुरा, गरियाबंद | आईएसबीएम विश्वविद्यालय, नवापारा (कोसमी), छुरा में उच्च शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान–2026 के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय मैदान के समीप स्थित रिक्त भूमि में विभिन्न उपयोगी एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संयुक्त कुलसचिव डॉ. रानी झा ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व के समक्ष एक अत्यंत गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। तापमान में निरंतर वृद्धि, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में कमी, वायु प्रदूषण और प्राकृतिक असंतुलन के कारण आने वाली पीढ़ियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इन चुनौतियों से बचाव के लिए वृक्षारोपण सबसे सरल, प्रभावी और प्राकृतिक उपाय है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा केवल हरियाली का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वच्छ वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध को सुदृढ़ करने का संदेश देता है। उन्होंने सभी से कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने का आह्वान किया।

अकादमिक अधिष्ठाता एवं आईक्यूएसी निदेशक डॉ. एन. कुमार स्वामी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण आवश्यक है, किंतु पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा, देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि जीवित और विकसित होने वाले पौधों से निर्धारित होती है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से आग्रह किया कि रोपे गए पौधों को सामूहिक उत्तरदायित्व के रूप में अपनाया जाए तथा उनकी नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जब एक पौधा सुरक्षित रूप से वृक्ष का रूप लेता है, तभी वृक्षारोपण का उद्देश्य वास्तव में पूर्ण होता है।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पौधे लगाए तथा विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रतिभागियों ने रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्राणीशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. लक्ष्मीकांत सिन्हा द्वारा किया गया। उन्होंने अभियान के उद्देश्य एवं महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिवसीय गतिविधि नहीं, बल्कि प्रकृति और भावी पीढ़ियों के प्रति दीर्घकालिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री टेकेश्वर कौशिक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन, अधिकारियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम की सफलता में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन “पौधा लगाएँ, पौधा बचाएँ और हरित भविष्य बनाएँ” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

Narayan dubey

संपादक शिखर न्यूज छत्तीसगढ़

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